लार प्रमुख की गद्दी बनती रही बाहुबलियों की दासी

जनपद देवरिया में कुल 16 ब्लॉकों में से 12 ब्लॉकों पर बीजेपी ने अपनी कब्जा जमा लिया जबकि सिर्फ 2 ही ब्लॉकों में सपा प्रत्याशियों को जीत मिली। वहीं दो जगह भाजपा के बागी प्रत्याशी को भी जीत मिली लार ब्लाक प्रमुख की कुर्सी अधिकांशतः बाहुबलियों की दासी बनकर रही। कुछ नामवर समाजसेवियों ने भी प्रमुख पद सम्हाला लेकिन ज्यादातर धनाढ्य और बाहुबलियों की ही वर्चस्व रहा। क्षेत्र में कमोवेश विकास तो सभी ने किया लेकिन पहले कमीशन कम शोहरत और यश के लिए विकास कार्य होते रहे बाद के वर्षों में कमीशन का काला अध्याय ही छाया रहा। कई बार कुर्सी पर मुखौटे और असल खिलाड़ी पर्दे के पीछे से काम करते रहे।
क्षेत्र पंचायत लार में कुल 71 ग्राम सभाएं हैं। बीडीसी के कुल 79 पद हैं। क्षेत्र पंचायत के गठन के बाद सबसे पहले चुरिया गांव के निवासी समाजसेवी मुल्कराज सिंह प्रमुख बने थे। उस समय ग्राम प्रधान ही प्रमुख चुनते थे। मुल्कराज सिंह के बाद उसी गांव के बाहुबली हंसनाथ सिंह प्रमुख बने । उनके बाद खेमादेई के निवासी प्रसिद्ध पहलवान व समाजसेवी बृजानंद सिंह ने प्रमुख पद पर अपना कब्जा जमाया। उनके बाद खेमादेई गांव के ही बाहुबली रामप्रवेश सिंह प्रमुख बने। राम प्रवेश के निधन के बाद उनकी धर्मपत्नी चन्द्रावती सिंह लार की प्रमुख बनीं। इसके बाद खेमादेई की रिकॉर्ड तोड़ने की हवा कुन्डौली गाव से उठी। कुन्डौली गांव के निवासी व बाहुबली राजू सिंह पहाड़ी ने लार की राजनीति में जखल दिया। सीट पिछड़ी हो गयी तो सजाव गांव की संगीता कुशवाहा को प्रमुख बनवाया। कुर्सी पर संगीता और पर्दे के पीछे राजू पहाड़ी विकास कार्यों में अपने फैसले लेते रहे। संगीता रबर स्टाम्प बनकर रह गईं।उसके बाद राजू सिंह पहाड़ी ने अपने बड़े भाई राकेश सिंह प्रमुख बनवाया। राकेश सिंह ने जब अगली बार सीट अनुसूचित हुई तो रावतपार रघेन के महानन्द प्रसाद को अपने प्रभाव और पैसे के बल पर प्रमुख बनवाया। राकेश सिंह ने जिस रिकार्ड तोड़ने का नारा दिया था वह नारा आज उन्हीं पर उल्टा पड़ गया। बरडीहा परशुराम के समाजसेवी व जल निगम के ठेकेदार अमित कुमार सिंह बबलू ने लोहा से लोहा काटने का फार्मूला अपनाते हुए लार क्षेत्र के बाहुबली उमेश यादव की पत्नी आरती देवी पर दांव लगा दिया। धनबल और बाहुबल का खूब प्रयोग हुआ। आरती देवी प्रमुख के पद पर आसीन हुईं। वे भी रबर स्टाम्प ही थीं असल कार्य तो उमेश यादव और बबलू सिंह ही करते रहे।
2021 के लार प्रमुख पद महिला के लिए सुरक्षित हो गयी। अनुभा सिंह पत्नी अमित कुमार सिंह बबलू बरडीहा परशुराम, डॉ विभा सिंह पत्नी श्याम सुंदर सिंह रामनगर व अंकिता सिंह पत्नी राजू पहाड़ी, कुंडऊलीके बीच संघर्ष रहा। इस चुनाव में अनुभा सिंह को 45 व डॉ विभा सिंह को 34 मत मिले।

अंकित सिंह पत्नी राजू सिंह ने अपना समर्थन बीजेपी कैंडिडेट विभा सिंह को दिया था।